
ईश्वर का अंश है मुझमें
सौंदर्य का रूप हूं मैं
सूरज से मैं रोशन होती हूं
चंद्रमा से मैं चमकती हूं
पृथ्वी के कण-कण में
प्रकृति के नाम से
हर किसी को भाती हूं
भारत देश मुझे प्यारी है
हर महीना अलग मौसम,
यही सौगात प्रकृति बन
इस देश को प्रदान करती हूं
कुछ को मैं चुभती हूं
कुछ को मैं सुशोभित करती हूं
पृथ्वी पर मैं प्रकृति नाम से जानी जाती हूं
आधुनिक जीवन में
मैं गुम हो गई हूं
लगता है ऐसा
मैं प्रकृति अब किताबों में सिमट गई हूं
पृथ्वी नष्ट हो रही है
मानव जाति त्यौहार मना रहे हैं
कई वैज्ञानिक दूसरे ग्रहों पर जीवन तलाश रहे हैं
मैं प्रकृति बस नाम की "प्रकृति" बन कर रह गई हूं


