
मैं फूल अर्पित करने आया हूँ
धरती मां के वीर सपूतों को
शत-शत नमन करने आया हूँ
धन्य हूं मैं इस पावन मिट्टी का,
क्योंकि इसी के गोद में
स्वाधीनता ने पहली सांस ली थी।
यही धूल हमारे लिए
चंदन-सी पवित्र रही है।
इस देश को आज़ाद कराने में
असंख्य वीरों ने जीवन दान दिया,
और आजादी के बाद
हमारे जवानों ने अपने साहस से
हर सीमा को सुरक्षित रखा है
ताकि हम खुले आसमान के नीचे
स्वतंत्रता की हवा को महसूस कर सके।
त्योहार हो या कड़कड़ाती सर्दियॉं,
वे सीमित राशन में भी
अपना हर दिन हंसकर काट देते हैं।
दिन हो या अंधियारी रात,
वे अपनी नींद
हमारी सुरक्षा के नाम कर देते हैं।
जय जवान,जय किसान की पुकार में
एक जय उन अमर सैनिकों का भी है,
जो तिरंगे की शान को
सरहदों पर हमेशा ऊंचा रखते हैं।
एयरफोर्स,नेवी और आर्मी,
तीनों की अद्भुत ताकत से
दुश्मन की काली नजरें
हमारी ओर बढ़ नहीं पाती है
गर्व है हमें इस भारत भूमि पर,
इस पावन माटी पर,
और उन जाबांज वीरों पर,
जिनकी उपस्थिति से ही
हम सचमुच आजादी को
हर सांस में जी पाते हैं।


