
वो मुझसे रूठ गई है
ना कुछ कहती है
ना मेरी कोई बात सुनती है
बस यही दोहराती है
“जाओ… अब मैं
तुमसे कुछ नहीं बोलूँगी।
आज पछतावे की एक लहर
दिल के दरवाज़े पर दस्तक देती है—
क्यों कल मैं उसकी बात न समझ पाया?
एक भूल की इतनी भारी सज़ा
कि दिल ने भी जैसे
मुझसे अपना रिश्ता तोड़ लिया।
सोचा कोई तोहफ़ा दूँ
एक दफ़ा सॉरी कह दूँ…
पर हर कोशिश
उसकी खामोशी में खो गई।
दिल कहता है
उसका रूठना जायज़ है
पर उसे मनाना भी तो
मेरे हिस्से का प्यार है।
जब वो खफ़ा होती है
मैं उसकी आँखों को पढ़ता हूँ।
उन आंखों में
अपने प्रेम की परछाई देखता हूं।
वह आँखें बताती हैं
कि वो मुझसे
अपने हिस्से का प्यार मांगती है।
और हर बार की तरह
वहीं आँखें सिखा जाती हैं
उसे मनाने का सच्चा तरीका।
आज फिर जाना,
प्यार की राहें कभी सूनी नहीं होतीं,
बस कदमों की आहट थम जाती है।
मैं चल पड़ा उसकी ओर,
दिल में उसका प्यार लिए हुए।
और उसकी आँखों ने मुस्कुरा कर कहा—
“तुम्हारी आहट ने
मुझे एक बार फिर तुम्हारा बना दिया।"
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