
क्या बचपन बेहतर है?
या जवानी बेहतर है?
लेकिन मैं कहता हूं
यह जीवन बेहतर है
फिर बचपन हो या जवानी दोनों ही बेहतर है
बचपन में हम सब
गुड़िया और गुड्डे होते हैं
जवानी में हम सब
जीवन के रंग में होते हैं
जवानी में हम सब
कई उतार-चढ़ाव देखते हैं
बचपन में हम सब
सिखलाहट की उम्र में होते हैं
सही या गलत की पहचान
भले ही बचपन में नहीं होती है
लेकिन जवानी में भी तो
संघर्षों के दौर में होते हैं
हर संघर्ष पढ़ाई नहीं होती है
जवानी के रंग
सबों के लिए अलग होती है
फिर बचपन हो या जवानी
दोनों ही बेहतर है
इसलिए मैं कहता हूं
यह जीवन बेहतर है


